हाईकोर्ट पहुंचे कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार, दायर की जमानत याचिका

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नई दिल्लीः धनशोधन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार कर्नाटक कांग्रेस नेता डी के शिवकुमार ने जमानत के लिए गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने निचली अदालत के बुधवार के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है जिसने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

निचली अदालत ने जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि शिवकुमार एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और अगर उन्हें जांच के इस महत्त्वपूर्ण चरण में रिहा किया जाता है तो वह जांच को बाधित करने के लिए गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या संबंधित दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।

उच्च न्यायालय से जमानत पाने के लिए शिवकुमार ने चिकित्सीय कारणों को भी आधार बनाया। अधिवक्ता मयंक जैन की तरफ से दायर याचिका में उन्होंने कहा कि वह सात बार विधायक रहे हैं और उनके भागने का कोई खतरा नहीं है।

साथ ही कहा कि यह मामला दस्तावेजी साक्ष्य पर आधारित है और उन्हें हिरासत में रखने का कोई आधार नहीं है क्योंकि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है। इस बीच, उनकी एक अन्य याचिका भी सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय के समक्ष आई जिसमें धनशोधन मामले में ईडी द्वारा रिकॉर्ड किए गए उनके बयानों की प्रति मांगी ग‍ई है। शिवकुमार और ईडी के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति बृजेश सेठी ने याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) की धारा 50 के तहत बयान केवल ईडी के निदेशक द्वारा दर्ज किया जा सकता है और शिवकुमार के मामले में किसी भी अन्य अधिकारी द्वारा दर्ज बयान रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए। शिवकुमार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता दायन कृष्णन ने कहा कि शपथ को जांचने की शक्ति केवल ईडी के निदेशक के पास है और किसी और के पास नहीं।

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