आओ पढ़े-आगे बढ़े सीरीज़ पार्ट 3 -अनस अली भोपाल

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✍✍ अनस अल ✍✍

अनस अली , मुस्लिम विकास परिषद का खास लेख ,

इस सीरीज़ के पार्ट तीन में हम बात करने जा रहे हैं भारत के इतिहास में जिन्हें सबसे बड़ा समाज सुधारक और सामाजिक न्याय की लड़ाई का प्रणेता माना जाता है जी हां यहां बात कर रहे हैं भारत रत्न पूर्व केन्द्रीय कानून मंत्री डॉ भीमराव अंबेडकर जी की जिन्हे भारतीय संविधान का जनक या पितामह माना जाता है।।।
अंबेडकर को अंबेडकर बनाया किसने??
एक दलित परिवार में जन्मा बालक आगे चलकर कैसे देश का संविधान बनाता है??
कैसे वह देश का कानून मंत्री बन जाता है।।
अंबेडकर के पिता उस समय सूबेदार हुआ करते थे,जब अंबेडकर को शिक्षा के लिए स्कूल भेजा जाता है तो वहाँ उन्हें काफ़ी भेदभाव का सामना करना पड़ता था, अध्यापक तो उन्हें पढ़ाना भी नहीं चाहते थे क्योकि एक दलित जाति से आते थे जिसे संविधान आने से पहले अस्पर्श्य माना जाता था और स्थिति बहुत दयनीय हुआ करती थी,अंबेडकर जी को अपने बैठने के लिए भी चटाई घर से ले जाना पड़ती थी क्योकी उनके साथ कोई बैठना नहीं चाहता था।।।
इस भेदभाव ने इस तरह के व्यवहार ने अबेंडकर को कमज़ोर नहीं किया उल्टा मजबूत बनाया और दृढ़ निश्चयी साहसी बनाया और उन्होने बचपन में ही ठान लिया था कि इस व्यवस्था से इस सिस्टम से मुझे लोहा लेना है इसके लिए हर हाल में मेरा शिक्षित होना अनिवार्य है।।
अंबेडकर पढ़े उन्होने बीए, एमए,पीएचडी की,कानून की पढ़ाई की बैरिस्टर बने, फिर इस सिस्टम के विरूद्ध इस व्यवस्था के विरूद्ध जमकर लड़े और हमारे भारत के इतिहास में सबसे बड़े समाज सुधारक बनकर उभरे साथ ही उन्होने सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ी एंव देश को संविधान देकर देश के हर नागरिक को समान अधिकार दिए चाहे वो किसी भी धर्म या जाति का हो।।
अंबेडकर भविष्य में करोड़ों लोगों के लिए एक प्रेरणा बने जिससे आज कई लोग अंबेडकर के विचारो को मानकर सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं।।
अगर अंबेडकर जी सफलता का मूल मंत्र देखा जाये तो वो शिक्षा ही निकलता है, उन्होने ऐसा ही एक नारा भी दिया था
“संगठित रहो शिक्षित रहो संघर्षशील रहो”
आज हमे अंबेडकर जी की जीवनी से एक बात स्पष्ट रूप से समझ आती है कि “जिंदगी के इस सफ़र में अगर आप शिक्षा का हाथ थाम लेते हैं तो फिर ये आपको भी नहीं मालूम रहता ये आपको कहां से कहां ले जाती है”
इस दुनिया में जितने भी महापुरुष गुज़रे है सबके जीवन का निचोड़ शिक्षा ही में नज़र आता है।।
इसलिए
“आओ पढ़े-आगे बढ़े

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