दिल्ली अग्निकांडः मौत से पहले दोस्त को आखिरी कॉल, बोला- भैया…बच्चों का ख्याल रखना

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नई दिल्ली: अनाज मंडी में रविवार को लगी भीषण आग में मारे गए लोगों के गम में डूबे परिवारवाले अपने प्रियजनों के आखिरी लफ्जों को याद करते हुए आंसुओं को थामने की नाकामयाब कोशिश करते रहे। सुबह 4 बजे के आसपास जब दिल्लीवासी रजाई में दुबक कर सो रहे थे तो मुशर्रफ अली बिहार फोन मिला रहा था। मुशर्रफ ने मरने से पहले अपने पड़ोसी को फोन किया। वो अपने पड़ोस में रहने वाले दोस्त से फन पर गिड़गिड़ाया। उसने बताया मैं मरने वाला हूं। मेरे मरने के बाद परिवार को देखने वाला कोई नहीं है, अब तुम ही सहारा हो, उनका ख़्याल रखना। मुशर्रफ ने सुबह 4 बजे के करीब पड़ोस के दोस्त को फोन किया। पड़ोसी मोनू (शोभित अग्रवाल) को मुशर्रफ का किए आखिरी कॉल रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है और इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो मंजर कितना भयावह होगा। उसने दोस्त मोनू से कहा, भैया खत्म होने वाला हूं आज मैं…आग लगने वाली है यहां, तुम आ जाना करोल बाग, गुलजार से नंबर ले लेना…। मोनू पूछता है कहां- दिल्ली में। इस पर मुशर्रफ कहता है- हां। मोनू मुशर्रफ से कहता है कि तुम वहां से निकलो पहले जल्दी।

मुशर्रफ कहता है, कोई रास्ता नहीं है। खत्म हूं मैं भइया आज तो. मेरे घर का ध्यान रखना..बच्चों का ख्याल रखना। तभी मुशर्रफ को घुटन होने लगती है तो वो मोनू को बताता है कि अब तो सांस भी नहीं लिया जा रहा है। पड़ोसी सलाह देता है कि पुलिस, फायर ब्रिगेड किसी को फोन करो और निकलने की कोशिश करो। जब मुशर्रफ, मौत को अपने सामने देखने लगा तो रोने लगा. कहता है- घर का ध्यान रखना भाई.. या अल्लाह… उसने अपने दोस्त से यह भी कहा कि वह सीधे उसके परिवार को उसके मरने की खबर न दे। पहले बड़े लोगों में बात करना.. कल लेने आ जाना, जैसे समझ में आए..। फिर उसकी आवाज आनी बंद हो जाती है.. पड़ोसी फोन पर हैलो-हैलो कहता रहता है. तभी फिर मुशर्रफ की आवाज आती है, वो कहता है- रोना मत… फिर मुशर्रफ बताता है कि फ्लोर तक आग पहुंच गई है… वो कहता है कि मर भी जाऊंगा तो रहूंगा वहीं पर… यहां आने की तैयारी कर लो। इसके बाद वो फोन कट कर देता है. लेकिन पड़ोसी का दिल नहीं मानता वो फिर से मुशर्रफ को फोन मिलाता है..। मुशर्रफ फोन उठाता है… वह दो पल सांस के लिए संघर्ष कर रहा था… कहता है कि इमामदिन के 5,000 रुपए बाकी है.. उसे वापस कर देना.. किसी का पैसा नहीं रखना है..। मुशर्रफ की जुबान लड़खड़ाने लगी थी..उसका दम टूट रहा था…अगले ही कुछ पलों में उसकी टूटती सांसों की आवाज आनी भी बंद हो गई…मुशर्रफ, जिंदगी की जंग हार चुका था…पड़ोसी हैलो-हैलो कहता रहा.. लेकिन दूसरी तरफ से कोई हलचल नहीं थी। मुशर्रफ की तीन बेटियां और एक बेटा है।

  • मौत सामने खड़ी देख 35 वर्षीय इमरान ने अपने पिता मोहम्मद नफीस को फोन कर उसे बचाने की गुहार लगाई और कहा कि वह जिंदा बाहर नहीं आ पाएगा। त्रासदी में अपने दो बेटे गंवाने वाले नफीस (58) ने कहा कि दोनों भाई छह साल पहले उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से दिल्ली आए थे। वे दूसरे तल पर स्थित थैला बनाने वाली इकाई का संचालन करते थे जिसमें करीब 25 लोग काम करते थे। नफीस ने रूंधे गले से कहा कि मेरे बड़े बेटे इमरान ने मुझे फोन किया और कहा, ‘अब्बू, इमारत में भीषण आग लग गई है। मैं जिंदा बाहर नहीं निकल पाऊंगा। मुझे बचा लीजिए।” उन्होंने कहा कि मैंने उसे दमकल विभाग को फोन करने को कहा और कॉल थोड़ी देर बाद कट गई। उसने फिर मेरा फोन नहीं उठाया।” नफीस के मुताबिक उन्हें सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि वह अपने छोटे बेटे, 32 साल के इकरम से आखिरी बार बात नहीं कर पाए।
  • बिहार के सहरसा के 18 वर्षीय मुस्तकिन ने अपने बड़े भाई अफसद (24) को इस त्रासदी में खो दिया जो तीसरी मंजिल पर स्थित जैकेट बनाने वाली इकाई में काम करता था। मुस्तकिन ने कहा कि अफसद इस बार अपने परिवार के साथ ईद नहीं मना पाया था। वह सोमवार सुबह घर जाने वाला था और शनिवार रात को किए गए आखिरी फोन में उसने मुझसे घर का कुछ सामान खरीदने को कहा था।
  • बिहार के मधुबनी जिले से 32 वर्षीय जाकिर हुसैन ने कहा कि उसके छोटे भाई शाकिर हुसैन ने अंतिम कॉल अपनी पत्नी को की थी। वह चौथी मंजिल पर स्थित टोपी बनाने वाले कारखाने में काम करता था। जाकिर ने कहा, “मैं फंस गया हूं। मैं जिंदा बाहर नहीं आ पाऊंगा।” दोनों भाइयों ने कल रात फोन पर बात की थी। उनके पिता भी दिल्ली में ही काम करते हैं और वे तीनों सोमवार को अपने गृहनगर जाने वाले थे। भाइयों ने रविवार को खरीददारी करने का मन बनाया था। जाकिर ने कहा कि शाकिर के तीन बच्चे थे, दो बेटियां और एक बेटा। उसकी पत्नी गर्भवती है।

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