दिल्ली में रह रहे बंगाली समुदाय को अपने साथ जोड़ने के लिए भाजपा बनाएगी विशेष इकाई

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नई दिल्ली। दिल्ली में रह रहे पश्चिम बंगाल के लोगो को अपने साथ जोड़ने के लिए भाजपा विशेष इकाई बनाएगी। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए पूर्वाचल मोर्चा बनाया गया है। इसी तरह से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए पर्वतीय प्रकोष्ठ है। इसी तरह से अब पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए भी अलग इकाई होगी। इसकी घोषणा दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने की है। वह प्रदेश कार्यालय में आयोजित बंगाली समाज सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

नई इकाई गठित करने की जिम्मेदारी उत्तरी दिल्ली नगर निगम के पूर्व महापौर आदेश गुप्ता को सौंपी गई है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राजधानी में पश्चिम बंगाल से संबंधित काफी संख्या में लोग रहते हैं। पार्टी में उन्हें प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। कार्यकर्ताओं ने ढोल की थाप पर नृत्य करके इस घोषणा पर खुशी जताई।

बंगाल के लोगों की तारीफ

केंद्रीय राज्य मंत्री देवश्री चौधरी ने कहा कि बंगाल ने देश की स्वत्रंता के लिए अनेकों बलिदान दिए हैं। आज उसी बंगाल में भय का माहौल है। प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू ने कहा कि बंगाल राष्ट्रवादी सोच के लिए जाना जाता है। पहले कम्युनिस्ट और अब तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने पश्चिम बंगाल को बदहाल कर दिया है।

प्रदेश सह प्रभारी तरुण चुघ ने कहा कि पश्चिम बंगाल और दिल्ली में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं की जा रही है। दोनों राज्यों की सरकारें गरीब विरोधी हैं। कार्यक्रम में सांसद जगन्नाथ सरकार, करोलबाग भाजपा जिला अध्यक्ष भारत भूषण मदान, सुबोध विश्वास, डॉ. सुशील मलिक, अमित विश्वास, डॉ. मंजू सरकार, कृष्णा हलधर और स्वप्न गोसाईं मौजूद थे।

मुस्लिमों का विश्वास बरकरार रखने की कोशिश में कांग्रेस

आगामी विधानसभा चुनावों में दिल्ली कांग्रेस मुस्लिम मतदाताओं का विश्वास बरकरार रखने की कोशिश में दिख रही है। यही वजह है कि भारत बचाओ रैली में भी प्रदेश कांग्रेस ने मुस्लिम समुदाय के लोगों की उपस्थिति भी दर्ज कराई। इसके लिए विशेष तौर पर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से लोगों को बुलाया भी गया था। साथ ही यह दिखाने की कोशिश की गई कि उनकी हमदर्द केवल कांग्रेस ही है।

दरअसल, लोकसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं का रूझान कांग्रेस की तरफ दिखाई दिया था। जिसकी वजह से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस वोट शेयर के मामले में दूसरे नंबर की पार्टी बन गई। 56.6 फीसद के सात भाजपा ने सातों लोकसभा सीटों पर जीत बरकरार रखी थी। लेकिन, कांग्रेस का वोट शेयर 22.5 फीसद रहा था। दिल्ली सत्तारूढ़ आप तीसरे स्थान पर चली गई थी। आम आदमी पार्टी (आप) का वोट शेयर 18.1 फीसद था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव की तुलना में कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनाव में करीब सात फीसद वोट शेयर की बढ़त हासिल की थी। इसलिए कांग्रेस लोकसभा की तर्ज पर मुस्लिम मतदाताओं को अपनी ओर बरकरार रखने की कोशिश कर रही है।

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