जामिया हिंसा पर SC सख्त, कहा-कोई पत्थर मारे, बस जलाए तो पुलिस FIR दर्ज करेगी ही

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नई दिल्ली: जामिया हिंसा मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में कहा कि बसें जलाई जाएंगी और पत्थर फेंके जाएंगे तो एफआईआर तो दर्ज होगी ही। वरिष्ठ वकील इंदिरा जय सिंह और कॉलिन गोंजालवेज ने सोमवार को चीफ जस्टिस एस.ए. बोबडे की बैंच से इस मामले में संज्ञान लेने को कहा था। इसी पर आज सुनवाई करते हुए सीजेआई ने कहा कि यह मामला हाईकोर्ट क्यों नहीं गया?, सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों लाया गया।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप लोगों को लीगल सिस्टम समझना होगा। ऐसे मामलों से आप हमें ट्रायल कोर्ट बना रहे हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि छात्रों की तरफ से हिंसा नहीं हुई है इस पर सीजेआई ने कहा कि फिर बसें कैसे जली और पथराव किसने किया। सीजेआई ने कहा कि बसें जलाए, पत्थर फेंके तो फिर एफआईआर को कैसे रोका जाए। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि हिंसा पूरे देश में हो रही है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को दखल देना होगा। इस पर चीफ जस्टिस नाखुश हुए और बोले कि हम ऐसा नहीं करेंगे, इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न करें।

हिंसा की पहले से थी तैयारी
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में लग रहा है कि जामिया नगर इलाके में जो हिंसा हुई उसकी तैयारी पहले से की गई थी। पुलिस ने बताया कि गीले कपड़े लेकर आंसू गैस के गोले पर डाले गए थे, पेट्रोल बम का भी इस्तेमाल हुआ था। यह सब बताता है कि हिंसा की पहले से प्लानिंग की गई थी। वहीं पुलिस ने जामिया इलाके में सुबह रेड मारकर 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। गिरफ्तार लोगों में कोई भी छात्र शामिल नहीं है।

बता दें कि रविवार को हुई हिंसा में डीटीसी की चार बसों, 100 निजी वाहनों और 10 मोटकसाइकलों को नुकसान पहुंचाया गया। हिंसा के दौरान कई पुलिसकर्मी और छात्र भी घायल हुए। नागरिकता कानून को लेकर छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे थे कि इसने हिंसक रूप ले लिया।
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस कार्रवाई के विरोध में सोमवार को वाराणसी, हैदराबाद, लखनऊ, मुम्बई और कोलकाता सहित देश के कई विश्वविद्यालय परिसरों में छात्रों ने प्रदर्शन किया। इस पूरे प्रकरण की जांच की मांग करते हुए सैंकड़ों छात्र दिल्ली की सड़कों पर उतर आए और सी.बी.आई. जांच की मांग की।

कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी राजनीतिक दलों ने विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ पुलिस की ‘‘बर्बरता’’ की सोमवार को निंदा की और घटना की न्यायिक जांच की मांग की। सोमवार को प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस नेता इंडिया गेट पर धरने पर बैठे। दिल्ली के जामिया मिलिया में हुई हिंसक झड़पों की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंप दी गई है और जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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