मंगलुरु में विरोध प्रदर्शन में 20 पुलिस कर्मी और दो लोग घायल, पांच थानों में कल तक कर्फ्यू की घोषणा

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बेंगलुरू। नागरिकता संशोधन कानून के लागू के बाद गुरुवार को कर्नाटक के मंगलुरु में विरोध प्रदर्शन हुए। इसमें 20 पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसमें दो घायल लोग आईसीयू में भर्ती हैं। यह जानकारी मंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त पीएस हर्षा ने दी। उधर, कर्नाटक राज्‍य रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन ने कहा है कि मंगलुरू डिविजन डिपो 2 में पथराव हुआ है। एक यात्री घायल हो गया और घटना में एक वाहन क्षतिग्रस्त हो गया।

विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर कर्नाटक के मंगलुरु कमिश्नरेट सीमा के पांच पुलिस थानों की सीमाओं पर शुक्रवार आधी रात तक कर्फ्यू की घोषणा की गई है। दक्षिण कन्नड़ (कर्नाटक) के जिला उपायुक्‍त सिंधु बी रुपेश ने कहा कि मंगलुरु नगर निगम के तहत सभी स्कूल और कॉलेज शुक्रवार को बंद रहेंगे।

ANI

@ANI

Karnataka: Curfew announced in 5 police station limits of Mangaluru Commissionerate limits (central sub division of Mangaluru) till tomorrow midnight.

49 लोग इस बारे में बात कर रहे हैं
कर्नाटक के कई शहरों में धारा 144 लागू

कर्नाटक में बड़े प्रदर्शनों की आशंका के चलते विशेष सतर्कता बरती गई है। बेंगलुरु समेत कर्नाटक के कई शहरों में तीन दिनों के लिए धारा-144 लागू कर दी गई है। कर्नाटक के उपायुक्त सिंधु बी रूपेश ने दक्षिण कन्नड़ जिले में धारा 144 लगाने का आदेश दिया है। कई इलाकों में विभिन्‍न दलों द्वारा आयोजित प्रदर्शनों को देखते हुए कर्नाटक मुख्‍यमंत्री बीएस येदियुरप्‍पा (BS Yediyurappa) ने गुरुवार को मुस्लिम समुदायों को शांत कराने की कोशिश की।

मुख्‍यमंत्री ने बुधवार को ऐलान किया कि उनकी सरकार 100 फीसद नागरिकता कानून को कर्नाटक में लागू करेगी। मुख्‍यमंत्री ने कहा, ‘मैं अल्‍पसंख्‍यक मुसलमान भाइयों से अपील करता हूं, यह कानून किसी भी तरीके से उन्‍हें प्रभावित नहीं करेगा आपके हित की रक्षा हमारी जिम्‍मेदारी है। कृपया सहयोग करें, शांति और व्‍यवस्‍था बनाए रखें।’

गौरतलब है कि इस कानून के विरोध में देशभर के विभिन्‍न इलाकों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बिल को पिछले सप्‍ताह संसद के दोनों सदनों में पारित किया था और राष्‍ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून में बदल गया। इस कानून के अनुसार 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्‍तान, अफगानिस्‍तान और बांग्‍लादेश से आए गैर मुस्लिमों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। ये अब अवैध शरणार्थी नहीं माने जाएंगे। इस कानून के तहत छह समुदायों के शरणार्थियों को 11 सालों के बदले पांच सालों में ही भारतीय नागरिकता

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