हिंदू रक्षा दल के पिंकी चौधरी ने ली JNU हिंसा की जिम्मेदारी, जांच में जुटी दिल्ली पुलिस

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नई दिल्ली-गाजियाबाद: जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में बीते दिनों हुई हिंसा की जिम्मेदारी हिंदू रक्षा दल ने ली है। हिंदू रक्षा दल के प्रमुख पिंकी चौधरी ने कहा कि जेएनयू लगातार देशविरोधी हरकतों का अड्डा बनता जा रहा है, हम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। जेएनयू में जो हिंसा हुई है हम उसकी पूरी जिम्मेदारी लेते हैं। हम कहना चाहते हैं कि हमला करने वाले हमारे कार्यकर्ता थे।

कम्यूनिष्ठों का अड्डा बन चुका है जेएनयू-पिंकी  
जेएनयू में हिंसा की जिम्मेदारी लेने के बाद पिंकी चौधरी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जेएनयू कम्यूनिष्ठों का एक अड्डा बन गया है। यहां देश विरोधी नारे लगाकर ये लोग पॉपुलर होना चाहते हैं। ये हमारे देश के लिए कितना घातक है ये लोग नहीं समझ रहे हैं। युवा पीढ़ी जो शिक्षा प्राप्त करने आई है वह शिक्षा न लेकर जितने भी देश विरोधी चीजें हैं उनके बारे में बोल रहे हैं। जिस तरह की गतिविधि यहां के छात्र कर रहे हैं ऐसी गतिविधि हम यहां नहीं होने देगें।

गाजियाबाद पुलिस ने किया तलब
जिम्मेदारी लेने के बाद गाजियाबाद पुलिस ने पिंकी चौधरी को तलब किया है।

जांच में जुटी दिल्ली पुलिस
हिंदू रक्षा दल के प्रमुख द्वारा किए गए इस दावे पर अब दिल्ली पुलिस एक्टिव हो गई है। पुलिस का कहना है कि उन्होंने इस मामले में संज्ञान लिया है और हर तरीके से इस दावे की जांच की जाएगी। इसके अलावा दिल्ली पुलिस की ओर से हिंसा की सीसीटीवी फुटेज भी जांची जा रही है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के जरिए नकाबपोश लोगों की तलाश हो रही है, इनकी पहचान कर कड़ा एक्शन लिया जाएगा।

बता दें कि इससे पहले दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच में ये सामने आया था कि जेएनयू में हिंसा करने वाले नकाबपोश एबीवीपी और लेफ्ट के कार्यकर्ता ही थे। इनकी पहचान कर पुलिस जल्द ही एक्शन लेगी। बता दें कि पुलिस ने अभी तक इस मामले में एशआईआर दर्ज कर ली है, हालांकि अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि पांच जनवरी की शाम को जेएनयू में दर्जनों नकाबपोश लोगों ने कैंपस में घुसकर तोडफ़ोड़ की थी। इस दौरान हमलावरों ने छात्रों और फैकल्टी पर हमला भी किया, जिसमें 30 से अधिक लोग घायल हुए। घायलों में छ्वहृस् की अध्यक्ष आइशी घोष भी शामिल थीं, जिनके सिर पर गंभीर चोट आई थी। इस हिंसा से जुड़े कुछ वीडियो साझा किए जा रहे हैं जिनमें एबीवीपी और लेफ्ट दोनों की तरफ से एक-दूसरे पर हिंसा का आरोप लगाया जा रहा है।

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