मोदी सरकार को एक और झटका, IMF के बाद फिच ने भी घटाया GDP ग्रोथ अनुमान

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भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार छठी तिमाही में सुस्ती बरकरार रहने वाली है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के बाद अब रेटिंग एजेंसी फिच ने भी इस वित्त वर्ष यानी 2020-21 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में सिर्फ 5.5 फीसदी बढ़त होने का अनुमान लगाया है।  हालांकि यह IMF के 4.8 और भारत सरकार के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के 5 फीसदी के अनुमान से काफी ज्यादा है।

फिच के मुताबिक इस समय कंपनियों और उपभोक्ताओं का आत्म विश्वास कम हो रहा है। फिच का अनुमान है कि साथ 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि 5.6 फीसदी और 2021-22 में 6.5 फीसदी तक जा सकती है। इससे पहले सरकार के अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती को दूर करने के तमाम प्रयासों के बीच फिच ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए विकास दर के 4.6 फीसदी रहने की संभावना जताई थी।

बता दें कि यह लगातार छठी तिमाही है जब जीडीपी में सुस्ती दर्ज की गई है। इससे पहले जनवरी-मार्च, 2013 तिमाही में जीडीपी विकास दर 4.3 फीसदी रही थी, वहीं एक साल पहले की समान अवधि यानी जुलाई-सितंबर, 2018 तिमाही में यह सात फीसदी रही थी। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर पांच फीसदी रही थी।

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