रूठी अमेठी में सोनिया भी अनमनी, राहुल की हार के बाद पहले दौरे पर कहीं ठहराव न अभिवादन

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रायबरेली। कारवां गुजर गया और अमेठी के बाशिंदे गुबार देखते रह गए। गुबार दिखा रहा था कि राजनीतिक रिश्तों की डोर कितनी कमजोर होती है। वर्ष 1967 के लोकसभा चुनाव से गांधी परिवार का जो मजबूत रिश्ता इस धरती से बना, वह राहुल गांधी की एक हार से यूं बिखर गया, जिसे सहेजने की तड़प न बतौर पार्टी अध्यक्ष मां सोनिया गांधी में दिखी और न ही महासचिव बहन प्रियंका वाड्रा में। पिछले दिनों हादसे में मारे गए ग्रामीणों के परिवारीजन से मुलाकात को छोड़ दें तो रूठी अमेठी में सोनिया अनमनी सी ही नजर आईं।

सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा बुधवार को रायबरेली पहुंचीं और भुएमऊ गेस्ट हाउस में प्रदेशभर से प्रशिक्षण के लिए जुटे जिला और शहर अध्यक्षों की संयुक्त बैठक को संबोधित किया। गुरुवार दोपहर करीब 12.30 बजे दोनों कांग्रेस नेता अमेठी के लिए रवाना हो गईं। लंबा-चौड़ा काफिला तेज रफ्तार से गांव, कस्बे पार करता रहा। सड़क के दोनों किनारों पर क्षेत्रवासी खड़े थे। कहीं-कहीं लोग एकजुट थे। शायद उम्मीद रही हो कि काफिला रुके, सोनिया या प्रियंका हालचाल लें, मगर ऐसा नहीं हुआ। गाड़ियां सीधे भरेथा मौजा में रुकीं, जहां के छह ग्रामीणों की पिछले दिनों सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। दो परिवारों से कुछ मिनटों की मुलाकात कर काफिला फिर उसी रफ्तार से वापस फुरसतगंज हवाई पट्टी के लिए दौड़ पड़ा।

अमेठी के बाशिंदों को शायद इसकी उम्मीद न रही होगी, क्योंकि राहुल गांधी यहां से सांसद रहे, तब सोनिया आती थीं तो भीड़ देखकर गाड़ी रुकवा देती थीं। चलते-चलते हालचाल ले लेती थीं। न रुकीं तो गाड़ी का शीशा नीचे कर हाथ जोड़ लेती थीं। राहुल गांधी की हार के बाद सोनिया का यह पहला अमेठी दौरा था। प्रियंका भी उसके बाद एक ही बार कुछ देर के लिए आई थीं। क्षेत्र को कई बड़े तोहफे दे चुके गांधी परिवार को भी संभवत: चुनाव के ऐसे परिणाम की उम्मीद न रही होगी, लिहाजा हार की टीस और अमेठी वालों के प्रति नाराजगी भी छिप न सकी।

अब सिर्फ रायबरेली परिवार

उत्तर प्रदेश में सिर्फ रायबरेली एकमात्र लोकसभा सीट है, जहां से वर्ष 2019 में कोई कांग्रेसी प्रत्याशी जीता। यहां से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी लगातार जीत रही हैं। अब यहीं से उनका लगाव भी बचा है। गुरुवार को दिल्ली रवानगी से पहले भुएमऊ गेस्ट हाउस में उन्होंने सिर्फ रायबरेली के पार्टी पदाधिकारियों से मुलाकात की, जबकि पहले अमेठी के कांग्रेसी भी ऐसी ही तवज्जो पाते थे।

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