विश्व कुष्ठ दिवस 2020: MP में कुष्ठ रोगियों के बच्चों को नहीं चुकानी पड़ती परीक्षा फीस

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भोपाल: विश्वभर में 30 जनवरी को कुष्ठ रोग मुक्त दिवस मनाया जा रहा है। वहीं मध्यप्रदेश में कुष्ठ रोगियों के बच्चों या आश्रितों को स्कूल फीस नहीं चुकाना पड़ती है। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 2017 में यह फैसला लिया था। कहा गया था कि ऐसे बच्चे जिनके माता पिता कुष्ठ रोगी हैं या कुष्ठ रोगियों पर आश्रित हैं, उनको बोर्ड परीक्षा की फीस अदा करने की समस्या नहीं रहेगी। इस कैटेगरी के बच्चों बिना बोर्ड परीक्षा फीस दिए फार्म भर सकेंगे।

शिक्षा विभाग की इस पहल के चलते बच्चे चाहे सरकारी स्कूल में पढ़ रहे हों या प्राइवेट स्कूल में हों उनको 10वीं या 12वीं की बोर्ड परीक्षा की फीस नहीं देनी होगी। जिन बच्चों ने अभी तक फीस चुकाई भी है उनकी फीस लौटाई जाएगी। कितने ऐसे बच्चे हैं जो कुष्ठ रोगी के सानिध्य में पढ़ रहे हैं उनकी लिस्ट भी शिक्षा विभाग तैयार कराएगा। इस संबंध में विभागीय रूप से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

शिक्षा विभाग की इस पहल का जिलेभर के लगभग 500 कुष्ठ रोगियों या उनके बच्चों को लाभ मिल सकेगा। अगर पिछले तीन माह की बात करें तो जिलेभर में 70 नए कुष्ठ रोगी सामने आए हैं। जिनके बच्चों को भी शिक्षा विभाग की इस पहल का लाभ मिल सकेगा। इस पहल का लाभ लेने के लिए बच्चों को अपने माता पिता या आश्रितों का चिकित्सा प्रमाणपत्र बनवाकर स्कूल में जमा कराना होगा।

कुष्ठ रोगी परिवारों से ताल्लुक रखने वाले बच्चे स्कूल में हैं या नहीं इसकी लिस्ट भी स्कूल स्तर पर तैयार की जाएगी। अगर स्कूल में इस कैटेगरी के बच्चे अध्ययनरत हैं तो स्कूल प्रबंधन को लिस्ट तैयार कर भेजनी होगी। जो छात्र इस लिस्ट में शामिल होंगे उनको संबद्घता वाले स्कूलों में बोर्ड परीक्षा फीस मुक्त किया जाएगा। अभी तक बच्चों को बोर्ड परीक्षा के लगभग 550 रुपए देने पड़ते हैं। यानी कुष्ठ रोगियों को उस श्रेणी में शामिल किया गया है। जिसमें राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी या पदक प्राप्त लोग आदि रखे गए थे। जिनके बच्चों को बोर्ड परीक्षा फीस फ्री कर दी गई है।

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