MP की कमलनाथ सरकार राज्य का खाली खजाना भरने के लिए लेगी मोंटेक सिंह अहलूवालिया की मदद

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भोपाल: प्रख्यात अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया मध्यप्रदेश के खाली खजाने को भरने के लिए प्रदेश सरकार को मंत्र देंगे। वो प्रदेश की अर्थव्यवस्था पटरी पर लाने के लिए मंथन करेंगे। प्रदेश सरकार ने उनसे मदद मांगी है। प्रदेश सरकार के बुलावे पर अहलूवालिया ने सहमति दे दी है। वो 18 फरवरी को भोपाल आ रहे हैं। अफसरों के साथ वो मैराथन बैठकें करेंगे और प्रदेश सरकार के दूसरे बजट के लिए रोडमैप भी तैयार करेंगे।

वहीं बीते 15 साल में बीजेपी सरकार में प्रदेश सरकार पर लगातार कर्ज बढ़ा है। कमलनाथ सरकार लगातार बोल रही है कि शिवराज सरकार ने हमें खाली खजाना सौंपा। खस्ता आर्थिक हालत के कारण कमलनाथ सरकार को बार-बार कर्ज भी लेना पड़ रहा है। वो अब तक 13600 करोड़ से ज्यादा का कर्ज ले चुकी है। प्रदेश पर 1.67लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज हो चुका है। कमलनाथ सरकार अब दूसरे बजट में जनता को राहत देने की तैयारी में है। सरकार ने नए टैक्स ना लगाने का आमजन से वादा किया है। सरकार अब अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया की मदद ले रही है। ऐसा अनुमान है कि आहलूवालिया जीएसटी के बाद लॉजिस्टिक हब पर फोकस कर सकते हैं।

वहीं प्रदेश सरकार के दूसरे बजट को लेकर ऐसे सैक्टर या इस तरह के विषयों पर भी मंथन किया जाएगा जहां सरकार को मितव्ययिता करना चाहिए। पिछली सरकार की फायदा ना देने वाली योजनाओं को बंद करने की तैयारी होगी। या फिर उनको नए प्लान के साथ तैयार करके लागू किया जाएगा। सरकारी कामकाज में खर्च को कम करने के दूसरे विकल्प भी तलाशें जाएंगे। प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए बूस्टअप डोज देने के लिए उद्योग रोजगार और सर्विस सेक्टर पर विचार किया जा सकता है। ऐसे सेक्टर चुने जाएंगे जहां निजीकरण को बुलाया जा सके। सामान्य कामकाज में रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ाने के लिए कई विकल्पों की तैयारी की जा रही है।रजिस्ट्री औऱ नामांतरण सहित जमीन प्रॉपर्टी से संबंधित वैकल्पिक उपाय आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए किए जा सकते हैं। आहलूवालिया के साथ अफसर खेती को फायदा का धंधा बनाने पर भी मंथन कर सकते हैं।

मोंटेक सिंह अहलूवालिया केंद्रीय योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वो 1980 के दशक से लेकर अब तक जारी आर्थिक सुधारों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े रहे हैं। आहलूवालिया को आर्थिक नीति और सार्वजनिक सेवाओं के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए 2011 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 1968 में वर्ल्ड बैंक के साथ युवा पेशेवर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद विश्व बैंक में कई पदों पर रहे​। इसके बाद मोंटेक सिंह 1979 में वित्त विभाग के सलाहाकार के तौर पर भारत सरकार से जुड़ गए। वो प्रधानमंत्री के विशेष सचिव वाणिज्य सचिव,आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव,वित्त सचिव,योजना आयोग के सचिव,पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य पदों पर रहे हैं। अपने बयानों को लेकर अहलूवालिया विवादों में भी रह चुके हैं। शहरी क्षेत्र में हर महीने 8596 रूपए और ग्रामीण क्षेत्र में 6728 रूपए खर्च करने वाले गरीब नहीं हैं और दो शौचालयों की मरम्मत पर 35लाख रुपए खर्च करने जैसे बयानों को लेकर वो विवादों में घिरे थे।

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