चीन-पाक के बाद अब नेपाल दिखा रहा भारत को आंख, राह में बन रहा रोड़ा

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चीन के साथ सीमा विवाद को सुलझाने तथा पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद से निपटने के लिए सेना प्रमुख की प्रतिबद्धता और प्रयासों के बावजूद अब एक और पड़ोसी देश नेपाल भारत की राह में रोड़ा अटकाने की कोशिश कर रहा है जिससे वैश्विक महामारी कोविड-19 से जूझ रहे भारत के सामने एक और चुनौती खड़ी हो सकती है। उत्तराखंड में सड़क निर्माण को लेकर चीन और पाकिस्तान के बाद अब नेपाल ने भारत के खिलाफ विरोध जताया है।

नेपाल ने उत्तराखंड में धारचूला से चीन सीमा पर स्थित लिपुलेख तक रोड लिंक बनाये जाने के विरोध में अपने यहां भारतीय राजदूत को समन जारी किया है। नेपाल सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने भारतीय राजूदत वी एम क्वात्रा को राजनयिक पत्र सौंपा। नेपाल सरकार का कहना है कि उत्तराखंड में जो सड़क बनायी गयी है, वह उसके क्षेत्र में है।

दूसरी तरफ भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल के दावे को खारिज करते हुए कहा कि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में हाल ही जिस रोड का उद्घाटन किया गया है वह पूरी तरह से भारत की सीमा में है। इस मार्ग पर आवागमन आसान हो जाने से तीर्थयात्रियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों और व्यापारियों को बहुत सहूलियत मिलेगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक भारत और नेपाल ने सीमा संबंधी मामलों को निपटाने के लिए एक तंत्र स्थापित किया है। नेपाल की सीमा संबंधी विवाद के निपटाने के लिए प्रक्रिया चल रही है।

भारत सीमा संबंधी लंबित मामलों को कूटनीतिक वार्ता और दोनों देशों के दोस्ताना द्विपक्षीय संबंधों की भावनाओं के अनुरूप हल करने को प्रतिबद्ध है। दोनों देश विदेश सचिव स्तर की वार्ता की तिथियां निर्धारित करने की प्रक्रिया में जुटे हैं। ये तिथियां कोरोना वायरस ‘कोविड-19′ के कारण उत्पन्न संकट से निपट लिये जाने के बाद निर्धारित कर ली जायेंगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गत शुक्रवार को उत्तराखंड में धारचूला से चीन सीमा पर स्थित लिपुलेख तक रोड लिंक का उद्घाटन किया था।