जैविक खेती के सहारे MP के किसान ने बदली सोच, 8 साल पहले छोड़ चुके हैं परंपरागत खेती

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बनखेड़ी गांव के गरधा में रहने वाला एक किसान पिछले 8 साल से जैविक खेती से चर्चा का विषय बना हुआ है। मानसिंह गुर्जर नाम का यह किसान सच में कृषि कर्मण्य अवार्ड का अधिकार रखता है। इतना ही नहीं इनका पूरा परिवार ही जैविक खेती के लिए समर्पित है। उनकी छोटी बेटी भी जैविक खेती का पूरा ज्ञान रखती है। किसान के छोटे बेटे का कहना है कि रासायनिक खाद खेती के लिए हानिकारक होती है। इसलिए सभी किसानों को जैविक खेती करनी चाहिए ताकि शुद्ध अनाज से खुद को व अपने देश को स्वस्थ रखा जा सकें।

मानसिंह गुर्जर ने इस बार भी गेंहू तथा चना की खेती की और गेंहू में 15 से 16 पर एकड़ का एवरेज़ निकाल। मानसिंह कई बार कई जगह सम्मानित हो चुके हैं। जैविक खेती के लिए उन्हें प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पुरस्कृत भी कर चुके हैं।

मानसिंह गुर्जर से जैविक खेती के गुण सीखने लोग अन्य प्रदेशों से भी आते है। जिसमें मानसिंह ने पंजाब से आए दर्जनों किसानों को जैविक खेती के गुर सिखाए इतना ही नहीं मानसिंह ने खुद पंजाब जाकर भी कई किसानों को जैविक खेती के गुर सिखाए थे। उन्होंने कहा कि पंजाब इस समय रासायनिक दवा की मार झेल रहा है, जिससे वहां की जमीन पूरी तरह बंजर हो चुकी है और कैंसर जैसी बीमारी ने भी अपने पैर पसार लिए है। जिससे वहां के कृषि विशेषज्ञ जैविक खेती की ओर ध्यान दे रहे हैं। मानसिंह बताते है की जैविक खेती में कोई लागत नहीं है यह गाय के गोबर और गोमूत्र और नीम की पत्ती जैसी चीजों से बनाया जाता जो हमें आसानी से उपलब्ध हो जाता है। इसमें पैसा भी खर्च नहीं होता और इस अनाज को खाने में कोई हानि भी नहीं होती और यह अनाज लेकर मंडियों में भी भटकना नहीं पड़ता। घर से ही बिक जाता है तथा रासायनिक अनाज से महंगा बिकता है।

वहीं जब कृषि विस्तार अधिकारी और तहसीलदार संजीव सक्सेना निरीक्षण करने मानसिंह के खेत पर पहुंचे तो वे खेती देखकर खुश हो गए तथा किसान की मेहनत की प्रशंसा की। उनके साथ पहुंचे कृषि विस्तार अधिकारी वी पी रघुवंशी ने कहा यदि राज्य का हर किसान जैविक खेती की ओर अग्रसर नहीं हुआ तो एक दिन प्रदेश का पंजाब जैसा हाल होगा। जहां रासायनिक खेती के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारी फैल रही है। रासायनिक खेती से जमीन काफी कठोर तथा बंजर होती जा रही है।

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