भोपाल और इंदौर में बढ़ रहा दबाव, शहरी सीमा के बाहर टाउनशिप बनाएं : कमलनाथ

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भोपाल। भोपाल का हर साल 6 तो इंदौर का 27 किमी की रफ्तार से विस्तार हो रहा है। लगातार बढ़ते शहरी विस्तार को लेकर अब सरकार भी चिंतित है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दोनों ही शहर आस-पास के क्षेत्र व शहरी सीमा के बाहर नई टाउनशिप और अर्बन प्लानिंग के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को मप्र अर्बन डेवलमेंट कंपनी के संचालक मंडल की बैठक में निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों की अधोसंरचना में विस्तार के कारण दवाब भी बढ़ रहा है। नई टाउनशिप विकसित कर नियंत्रित किया जा सकेगा। उन्होंने बड़े शहरों में जनसंख्या घनतत्व को देखते हुए डिस्पर्सिबल सिटी पर भी विचार करने की बात कही। इसके अलावा उन्होंने प्रस्तावित भोपाल-इंदौर न्यू एक्सप्रेस वे एलाइनमेंट में आने वाले सभी शहरों के दोनों ओर कॉरीडोर बनाने का निर्देश भी दिया है।

खाली पड़ी सरकारी जमीन के लिए प्लान करें तैयार

सीएम ने सरकारी कार्यालयों और संस्थानों के पास खाली पड़ी जमीन के उपयोग पर भी जोर दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी भूमि पर बिल्टअप के लिए रूपरेखा तैयार की जानी चाहिए। इस प्लानिंग में भोपाल व इंदौर को प्राथमिकता देने की बात उन्होंने कही है। अतिशेष सरकारी भूमि पर खाली पड़ी जमीन पर प्लानिंग कर प्राप्त होने वाली रकम को नगरीय विकास में लगाने की बात मुख्यमंत्री ने कही है।

स्मार्ट सिटी के अलावा शहरी विकास के लिए बनाए विशेष योजना

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में घोषित सात स्मार्ट सिटी के अलावा भी अन्य शहरों में नागरिक सुविधाओं और डेवलवमेंट के लिए विशेष योजना बनाने के लिए निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने प्रदेश की सात नगर निगमों का चयन स्मार्ट सिटी के रूप में किया है। शेष नगर निगमों में शामिल बुरहानपुर, मुरैना, छिंदवाड़ा, देवास, खंडवा, रतलाम, रीवा, कटनी व सिंगरौली के विकास पर जोर दिया जाए।

2020 तक सीवेज व जल संबंधित कार्य पूरे होने चाहिए

मुख्यमंत्री ने 66 नगरीय निकायों में 3 हजार 450 करोड़ की जल और सीवरेज योजनाओं का कार्य 2020 तक पूरे करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों के अधोसंरचना विकास के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की सहायता से ज्यादा से ज्यादा योजना तैयार करें। ताकि केंद्र सरकार की विभिन्ना योजनाओं का लाभ प्राप्त किया जा सके। जो शहर अधोसंरचना निर्माण में आगे हैं, उनके वित्तीय प्रबंधन का अध्ययन कर प्रदेश के लिए बेहतर और उपयोगी मॉडल अपनाया जाए। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धन सिंह, मुख्य सचिव एसआर मोहंती, एसीएस एम. गोपाल रेड्डी व गौरी सिंह के साथ पीडब्ल्यूडी, नगरीय प्रशासन, पीएचई के प्रमुख सचिव भी मौजूद रहे।

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