रविश कुमार का पोल्स ऑफ पोल्स का विश्लेषण

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रविश कुमार का पोल्स ऑफ पोल्स का विश्लेषण

प्रोत्साहित न्यूज़ की तरफ से मैं ज़मीर आलम , यह विश्लेषण आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ।

सबसे पहले उस बात को समझने की ज़रूरत है कि एग्जिट पोल किसे कहते हैं।
लगभग 2012 -13 से एग्जिट पोल्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया है , असल मे पहले क्या होता था कि पोलिंग बूथ से कम से कम 250 मीटर की दूरी पर एक डमी मतदान उस मतदाता से कराया जाता था जो मतदान करके लौट रहा होता था , इस समय सिर्फ यह मालूम होता था कि यह मतदाता है , बाकी उसकी ज़ात , ग्राम , पता कुछ भी मालूम नहीं किया जाता था , और ज़रूरी नहीं होता था कि हर मतदाता , यहाँ दोबारा डमी मतदान करे , लिहाज़ा एक छोटी संख्या पर प्रयोग करके यह अनुमान लगाया जाता था कि कौन जीत रहा है , यहाँ इस बात को भी नोट कर लीजिए कि यह जो लोग दोबारा मतदान करते थे इन्हें सैम्पलिंग कहा जाता है।
अब आज कल यह प्रिक्रिया प्रितिबन्धित है , पर अब जो प्रक्रिया होती है उसे प्री-पोल कहते तो अधिक उचित होता  पर दुर्भागय से इसे एग्जिट पोल ही प्रचारित कर दिया गया है,  इस नई प्रक्रिया में मतदान करके आए व्यक्ति से कैमरे के सामने पूछा जाता है कि उसने किसको वोट दिया ? इस प्रशन का उत्तर कितना सही या कितना गलत दिया जाता है इस पर विषेज्ञों की अपनी अलग राय है , रविश कुमार के शो में बुलाए गए विषेज्ञों कि माने तो “कैमरे के सामने उत्तर देते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि उस क्षेत्र के हिसाब से उत्तर क्या होना चाहिए जबकि अकेले में वोटर अपनी निजी विश्लेषण पर मतदान करके आया होता है” , इसको कम शब्दों में यह कहा जा सकता है कि व्यक्ति अकेले में अलग व्यवहार करता है और भीड़ में य कैमरे के सामने अलग व्यवहार करता है लिहाजा उसने कैमरे के सामने क्या कहा यह इस बात का प्रमाण नहीं हो सकता कि उसने अकेले में क्या किया य किसको मतदान किया साथ ही इन पत्रकारों ने अपने निजी सर्वे की कहानियां सुनाईं जिसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि , जिन स्थानों पर यह लोग सर्वे के लिए गए वहां जी जनता मोदी जी के कार्यों से खुश नहीं थी , जनता का कहना निम्न – अनुसार है।
1) जो पुल बनाए गए उसमे विदेशी कम्पनियों को काम दिया गया , हमे क्या मिला?
2) बिजली के खंभे लगा दिए पर हर घर तक बिजली के तार जब तक नहीं आएंगे जब तक उन खम्बों का क्या फायदा?
3) कहीं कहीं बिजली के खंभे से कुछ घरों तक तार भी गए हैं पर वह उस जाती के घर हैं जो उस क्षेत्र में अधिक संख्या में हैं ये यूं कहें कि वोट बैंक हैं।
4) इस स्तिथि में सबका साथ सबका विकास न होते हुए उस खास जाती का ही विकास किया जा रहा है।

पर एक बात और है कि यह पत्रकार जो सैंपलिंग ले रहे हैं वह बहुत कम है और जो सर्वे कंपनियां ले रही हैं वह बहुत ज़्यादा इसलिए यह कहना भी गलत होगा कि सर्वे झूठे हैं।
बहराल 23 मई 2019 से पहले कोई कुछ नही बोल सकते ।

प्रोत्साहित न्यूज़ 18 , यहाँ NDTV पर प्रसारित हुए इस प्रोग्राम का फेसबुक लिंक दे रही है ताकि आप खुद इस ज्ञानवर्धक वार्तालाप को देख- सुन सखें। धन्यवाद

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