चीन की आक्रामकता से निपटने के लिए भारत जैसे पार्टनर के साथ काम करना जरूरीः अमेरिका

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वॉशिंगटनः हिमालय से लेकर दक्षिण चीन सागर तक हिंद प्रशात सागर तक चीन के बढ़ते आक्रामक व्यवहार को देखते हुए ट्रंप प्रशासन कहा कि यह पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है कि हम भारत जैसे सहयोगियों के साथ मिलकर काम करें। ट्रंप प्रशासन के अधिकारी ने कहा, ‘क्वाड देशों  भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ शिखर सम्मेलन के बारे में, फिलहाल कोई योजना नहीं है, लेकिन भविष्य में कुछ भी हो सकता है।’ अमेरिकी का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर अगले हफ्ते भारत के दौरे पर आने वाले हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो अगले सप्ताह तीसरी बार भारत-अमेरिका टू प्लस टू वार्ता के लिए नई दिल्ली आएंगे। यह एक महीने से भी कम समय के अंदर उनकी दूसरी एशिया यात्रा है। भारत के अलावा वे मालदीव, श्रीलंका और इंडोनेशिया भी जाएंगे। बता दें कि अमेरिका में तीन नवंबर को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है और चुनाव से पहले भारत और अमेरिका के बीच ट्रंप सरकार की आखिरी सबसे बड़ी राजनयिक वार्ता होगी। इस दो दिवसीय वार्ता में भारत और अमेरिका के टॉप-चार कैबिनेट मंत्री भाग लेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के संबंधों की आगामी चार साल के लिए आधारशिला रखे जाने की संभावना है, भले ही चुनाव कोई भी जीते।

वाशिंगटन डीसी में फॉरेन प्रेस सेंटर द्वारा आयोजित ‘कांफ्रेंस कॉल’ के दौरान एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने  कहा, “हिमालय से लेकर दक्षिण चीन सागर तक हिंद-प्रशांत में चीन के बढ़ते आक्रामक व्यवहार के कारण हमारे लिए समान सोच रखने वाले भारत जैसे साझेदारों के साथ मिलकर काम करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। “

उन्होंने कहा कि ‘अमेरिका अंतरराष्ट्रीय विकास वित्त सहयोग’ (यूआईडीएफसी) ने भारत में निवेश परियोजनाओं में 50 करोड़ डॉलर की सहायता मुहैया कराने की प्रतिबद्धता जताई है और हाल में मुंबई में एक प्रबंध निदेशक को नियुक्त किया है, जो भारत और क्षेत्र में निवेश को विस्तार देने में मदद करेगा। अधिकारी ने बताया कि कोविड-19 का टीका विकसित करने के संयुक्त प्रयास उल्लेखनीय प्रगति के साथ जारी है। उन्होंने बताया कि छह से अधिक अमेरिकी कंपनियां और संस्थान ‘सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ जैसे भारतीय साझेदारों के साथ मिलकर टीका खोजने का प्रयास कर रहे हैं.।