5 पीढ़ियों से अनसुलझी बीमारी का दंश झेल रहा बैगा परिवार, कैसे मिलेगी राहत?

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मंडला: राष्टीय मानव कहे जाने वाला एक बैगा परिवार पिछली 5 पीढ़ी से एक अनसुलझी बीमारी का दंश झेल रहा हैं। यह बीमारी उनके लिए अभिशाप बनकर टूट पड़ी हैं। बीमारी ऐसी कि चिकित्सा व्यवस्था मे भी इसका ईलाज नहीं जिसकी वजह से आज ये बैगा परिवार आर्थिक और मानसिक तौर से परेशान हैं। इस बीमारी का नाम चिकित्सा व्यवस्था में मिलरॉय के नाम से जाना जाता हैं और ग्रामीण परिवेश मे इसे हाथी पांव भी कहा जाता हैं। इस बीमारी का कोई ईलाज भी नहीं है।

मामले को प्रशासन के संज्ञान मे लाने के बाद जिला कलेक्टर नें जांच के आदेश दिए हैं। वही स्थानीय मेडिकल टीम को उस गांव में भी भेजा गया। साथ ही शासन-प्रशासन स्तर पर मदद का भरोसा दिलाया हैं।
मंडला जिला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है जहां बहुतायत में आदिवासी बैगा परिवार निवास करता हैं। हम बात कर रहे हैं मंडला जिले का सबसे पिछड़े छेत्र विकासखंड घुघरी के सुरहली गांव की जहां 5 पीढ़ीयों से चली आ रही बीमारी से ग्रस्त हैं। पहले यह बीमारी परिवार के एक सदस्य को हुई उसके बाद इसने अपने पैर पसारे और सभी को अपने शिकंजे में ले लिया। क्या बुजुर्ग क्या बच्चे सभी को इस बीमारी ने अपनी गिरफ्त में ले लिया।

इस बीमारी का नाम चिकित्सा व्यवस्था में मिलरॉय के नाम से जाना जाता हैं और ग्रामीण परिवेश मे इसे हाथी पांव भी कहा जाता हैं। बच्चों के पैदा होने के कुछ वर्षों बाद इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। पैरों का मोटा होना जिसकी वजह से चल नहीं पाना है। अब तक इस बीमारी नें 10 लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लिया हैं। सुरहली गांव के इस बैगा परिवार से एक लड़की का विवाह नजदीक के गांव देवहरा में हुआ लेकिन उसे भी यह बीमारी हुई और उसकी 3 बेटियों को भी इस बीमारी ने घेर लिया। आज ये गरीब बैगा परिवार कुछ भी काम करने मे सक्षम नही हैं।

इस परिवार से मिलने के लिए 3 से 4 वर्ष पूर्व चिकित्सा विभाग की टीम भी पहुंची थी लेकिन उनके उपचार का कोई प्रभाव इन पर नहीं पड़ा। अभी भी उनकी स्थिति जस की तस हैं। आज भी ये बैगा परिवार अपने ठीक होने की आस लगाए बैठा हैं कि कोई पहुंचेगा और उनकी इस लाइलाज बीमारी को ठीक करेगा। वहीं प्रशासन से उम्मीद भी कर रहा हैं कि उन्हें आर्थिक मदद दी जाएं। मिल रॉय बीमारी का चिकित्सा व्यवस्था मे कोई ईलाज नहीं केवल इसे गोलियों से कंट्रोल किया जा सकता हैं। यह बीमारी आनुवंशिक हैं जिसका ईलाज नहीं हैं। इस मामले को संज्ञान में लाने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अपनी टीम गांव पहुंचाने की बात कही है।