CM Kamal Nath की नाराजगी के बदलेगी युवा स्वाभिमान योजना, ऐसा होगा स्वरूप

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भोपाल। युवाओं को 4 हजार रुपए महीना स्टाईपेंड देने के लिए लोकसभा चुनाव से पहले आनन-फानन में लागू की गई युवा स्वाभिमान योजना में राज्य सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस योजना के तहत मिलने वाली स्किल ट्रेनिंग से पहले युवाओं की काउंसिलिंग का फैसला किया है। इस काउंसिलिंग में युवाओं को बताया जाएगा कि जिस ट्रेड को उन्होंने ट्रेनिंग के लिए चुना है, उसमें उनके पास भविष्य में रोजगार के क्या विकल्प होंगे?

गौरतलब है कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री कमलनाथ ने युवा स्वाभिमान योजना की समीक्षा की थी। इस समीक्षा बैठक में उन्होंने योजना के फेल होने पर काफी नाराजगी जताई थी। बात योजना को बंद करने तक पहुंच गई थी, हालांकि बाद में फैसला हुआ कि इसे बंद न कर कुछ बदलाव कर दिए जाएं। इसके बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने योजना में बदलाव का खाका तैयार किया है।

दो महीने ट्रेनिंग और दो महीने निकाय में काम

योजना के तहत युवाओं को अब एक बार में एक ही काम करेंगे। युवाओं को दो महीने ट्रेनिंग दी जाएगी और दो महीने निकाय में काम करवाया जाएगा। अभी इस योजना के तहत एक दिन में चार घंटे की स्किल ट्रेनिंग और चार घंटे निकाय में काम करवाया जा रहा है। यह फार्मूला सफल नहीं हो पाया, इस वजह से इसमें बदलाव किया जा रहा है।

स्किल सेंटर जाने फ्री मिलेगा बस पास

अब योजना में स्किल ट्रेनिंग लेने वाले युवाओं को सेंटर तक जाने के लिए फ्री बस पास भी दिया जाएगा। दरअसल, योजना की शुरुआत से ही यह शिकायत आ रही थी कि युवाओं को ट्रेनिंग लेने शहरों में कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। इस समस्या को खत्म करने के लिए फ्री बस पास उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है।

लोन मेले लगाए जाएंगे

युवाओं को ट्रेनिंग देने के बाद नगरीय विकास एवं आवास और तकनीकी शिक्षा विभाग लोन मेला भी लगाएगा, ताकि इन युवाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए लोन मिल सके।

सिर्फ एक तिहाई लोगों को मिला स्टाईपेंड

योजना की विफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश भर में ट्रेनिंग ले रहे युवाओं में से सिर्फ एक तिहाई को ही दो महीने का स्टाईपेंड मिल पाया है। सूत्रों के मुताबिक पहले चरण में 18 हजार लोगों को ट्रेनिंग देना शुरू किया गया था, इसमें से सिर्फ 6 हजार लोगों को ही स्टाईपेंड मिला है। इसकी वजह युवाओं की ट्रेनिंग सेंटर में कम उपस्थिति है। नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों के मुताबिक लोगों ने इसे सिर्फ बेरोजगारी भत्ता समझकर रजिस्ट्रेशन करवा लिया था, इस वजह से युवाओं में योजना को लेकर भ्रम पैदा हुआ।

इनका कहना है

युवा स्वाभिमान योजना को पायलट के तौर पर लागू किया था। अब इसमें कुछ बदलाव कर इसे और बेहतर बनाया जा रहा है।

– जयवर्द्धन सिंह, मंत्री, नगरीय विकास एवं आवास विभाग

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