Budget 2019 Live: वित्त मंत्री संसद में पेश रही है ‘बही खाता’

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नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण के दौरान एक शेर भी पढ़ा। निर्मला ने कहा, ‘यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है’ ये शेर मशहूर शायर मंजूर हाशमी का है। वित्त मंत्री ने सीतारमन ने कहा कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर सरकार का जोर होगा, इलेक्ट्रिक बैटरी चार्ज करने के लिए इंफ्रा स्ट्रक्चर बनाएंगे। वित्त मंत्री ने कहा भारत रोजगार देने वाला देश बना है। भारत माला योजना से रोड बन रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में हमें 55 साल लग गए लेकिन हम इसी साल 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हो जाएंगे। मोदी सरकार ने जो लक्ष्य निर्धारित किए हैं उन पर सरकार तेजी से काम कर रही हैं। मुद्रा योजना से लोगों की जिंदगी बदली है और सभी बड़े उद्योगों में बड़े निवेश की जरूरत को समझा है। मोदी सरकार ने भारत को रोजगार देने वाला देश बनाने की दिशा में काम किया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश कर दिया है। उन्होंने कहा है कि मोदी सरकार का लक्ष्य, मजबूत देश और मजबूत नागरिक बनाना है और सरकार की सारी नीतियां इसी ओर काम कर रही है। निर्मला सीतारमण पेश कर रही हैं देश का ‘बही-खाता’, सामने रखा दशक का लक्ष्य। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2019-20 का बजट पेश कर दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सुधार करना है, परफॉर्म करना है और ट्रांसफर्म करना है की नीति पर काम किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के माता-पिता सावित्री और नारायण सीतारमण भी संसद भवन पहुंचे हैं। देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री के तौर पर उनकी पुत्री निर्मला सीतारमण अपना पहला बजट पेश करने जा रही हैं।

केंद्र की सत्ता में दोबारा आने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार 2.0 का आज पहला बजट आने वाला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज पहला बजट पेश करेंगी। लेकिन वित्त मंत्रालय के बाहर आज पहली बार एक अलग तस्वीर दिखने को मिली। इस बार उन्होंने एक परंपरा से अलग हटते हुए बजट दस्तावेज को ब्रीफकेस में न लेकर एक लाल रंग के कपड़े में रखा और उसके ऊपर अशोक चिन्ह लगा था। इस पर सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार के. सुब्रमण्यन का कहना का कि वित्त मंत्री ने लाल रंग के कपड़े में बजट दस्तावेज को रखा है। यह एक भारतीय परंपरा है। यह पश्चिमी विचारों की गुलामी से निकलने का प्रतीक है, यह बजट नहीं है, ‘बही खाता’ है।

असल में, ब्राउन कलर की अटैची का बजट से बड़ा पुराना नाता है। यह रिश्ता 1860 से बना हुआ है। बजट फ्रांसीसी शब्द ‘बॉगेटी’ से बना है, जिसका मतलब लेदर बैग होता है। पहली बार 1860 में ब्रिटेन के ‘चांसलर ऑफ दी एक्सयचेकर चीफ’ विलियम एवर्ट ग्लैडस्टन फाइनेंशियल पेपर्स के बंडल को लेदर बैग में लेकर आए थे। ब्रिटेन की महारानी ने बजट पेश करने के लिए लेदर का यह सूटकेस खुद ग्लैगडस्टमन को दिया था। तभी से यह परंपरा चल रही है जिसे आज वित्त मंत्री सीतारमण बदलती हुई नज़र आईं।

वित्त मंत्री मंत्रालय से रवाना हो गई हैं। गौरतलब है कि पूरे देश में अलग अलग तबके के लोग काफी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि ज़ोरदार बहुमत के साथ आई सरकार उनके लिए कुछ न कुछ ज़रूर लाएगी। नौकरीपेशा लोग टैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं। किसान, युवा, व्यापारी, सभी की नज़रे बजट पर होंगी। बजट में राजकोषीय घाटे को क़ाबू में रखने के साथ आर्थिक वृद्धि और रोज़गार बढ़ाने पर सरकार का ज़ोर रह सकता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए आयकर के मोर्चे पर टैक्स स्लैब मे बदलाव की उम्मीद भी की जा रही है।

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