किसान आंदोलन के बुने जाल में खुद उलझ गई कांग्रेस, गृह मंत्री ने किसानों पर दर्ज मुकदमों को सही बताया

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भोपाल : 2017 में जिस किसान आंदोलन के बाद से ही तत्कालीन शिवराज सरकार को किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज करने का आरोप लगा कर कांग्रेस कांग्रेस सत्ता में आई। अब उसी कार्रवाई को सत्ता मिलने के बाद कमलनाथ सरकार सही बता रही है। विधानसभा में एक प्रश्न के जवाब में गृहमंत्री ने बताया है कि उस वक्त किसानों पर जो आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए थे वो विधि सम्मत थे। गृहमंत्री के इस कबुलनामे के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में तूफान मच गया है

दो साल पहले मंदसौर समेत प्रदेश भर के कई हिस्सों में उग्र किसान आंदोलन हुए थे। तत्कालीन शिवराज सरकार के खिलाफ हुए इस आंदोलन पर कांग्रेस ने भी जमकर विरोध किया था, उस वक्त राहुल गांधी समेत कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं ने किसान आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में किसानों के ऊपर दर्ज मुकदमो को न सिर्फ गलत बताया था बल्कि इसके लिए बीजेपी को जिम्मेदार भी ठहराया था और बीजेपी को किसान विरोधी बता बता कर सत्ता भी हासिल कर ली। लेकिन कहते हैं ना, वक्त बदलता है तो तेवर भी बदलते हैं और काम करने का तरीका भी। वो कांग्रेस जो पहले किसानों के ऊपर दर्ज मुकदमों को गलत बता रही थी आज वही कांग्रेस पार्टी के एक बयान ने राजनीति में भूचाल ला दिया है। कांग्रेस ने विधानसभा के मॉनसून सत्र में किसानों पर दर्ज प्रकरणों को सही बताया है। जी हां, कमलनाथ सरकार के गृहमंत्री बाला बच्चन ने कांग्रेस के ही विधायक हरदीप सिंह डंग के एक सवाल का जवाब देते हुए बताया है कि ‘किसानों पर विधिसम्मत प्रक्रिया अनुसार आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए हैं’।

दरअसल, कांग्रेस के विधायक हरदीप सिंह डंग ने गृह मंत्री बाला बच्चन से सवाल पूछा था कि मई और जून 2017 में कितने किसानों के खिलाफ राजनीतिक द्वेषतापूर्ण मामले दर्ज किए गए हैं और राज्य सरकार ने उन पर क्या कार्रवाई की है। इसी सवाल का गृह मंत्री बाला बच्चन ने लिखित जवाब दिया है कि विधि सम्मत प्रक्रिया के अनुसार उस समय किसानों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं’। अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या कांग्रेस ने किसानों के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए झूठ बोला क्योंकि तब किसानों पर की गई कार्रवाई को झूठा बताते हुए कांग्रेस ने बीजेपी पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया था और विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे को खूब भुनाया भी था। विधानसभा में पूछे गए सवाल पर गृहमंत्री ने विधायक को बताया है कि किसानों पर दर्ज प्रकरणों की वापसी के लिए दिशा निर्देश भी जारी कर दिये गए हैं। लेकिन कांग्रेस विधायक के सवाल पर मंत्री ने जब पुलिस की कार्रवाई को विधि सम्मत बताते हुए तत्कालीन बीजेपी सरकार को क्लीनचिट दी तो बीजेपी को कांग्रेस पर हमला बोलने का मौका मिल गया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कांग्रेस को झूठों की पार्टी बताया है

गोपाल भार्गव ने कहा है कि ‘लगभग दो वर्ष पहले मंदसौर की घटना हुई थी जिसमें गोली कांड हुआ, उस वक्त किसानों और अन्य लोगों की मृत्यु हुई थी। जिसमें कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी ने मौके पर जाकर आरोप लगाया था कि राज्य में बीजेपी की सरकार और उसकी पुलिस ने ही किसानों पर गोलियां चलवाईं है। निर्दोष किसानों की जानबूझकर हत्या की’ गोपाल ने कहा कि मामले को लेकर कार्रवाईयां भी हुईं आरोप भी तय हुए, और जब आरोप प्रमाणित नहीं पाए गए तो उसके बाद में विधानसभा सत्र में ये रिपोर्ट आ गई थी, कि इसमें प्रशासन और पुलिस का कोई दोष नहीं है। लेकिन अब जो गृहमंत्री का बयान आया है व सिद्ध करता है कि कांग्रेस ने मंदसौर में हुए किसान आंदोलन को लेकर सिर्फ राजनीति ही की है।

विधानसभा में अपनी ही पार्टी के विधायक को दिए गए जवाब पर जब गृहमंत्री बाला बच्चन से पत्रकारों ने सवाल किया तो वह इससे कन्नी काटते नजर आए और बोले कि विधानसभा में दिया गया जवाब सिर्फ मंदसौर की घटना के लिए नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए था। आपको बता दें कि इससे पहले फरवरी 2019 में विधायक हर्ष गहलोत द्वारा विधानसभा में पूछे गए लिखित सवाल का जवाब देते हुए गृहमंत्री ने बताया था कि जून 2017 को महू-नीमच हाईवे पर की गई पुलिस फायरिंग स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत आत्मरक्षा के लिए की गई थी। बीजेपी ने इसे मंदसौर मामले पर कांग्रेस का यू-टर्न बताया था और उस वक़्त विवाद इसलिए भी ज्यादा बढ़ गया था क्योंकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस मामले में खुद की सरकार के गृहमंत्री को कटघरे में खड़ा कर दिया था। हालांकि देखना अब यह होगा कि कांग्रेस के इस कबूलनामे के बाद बीजेपी इस मुद्दे को किस तरह भुनाती है।

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